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पशुओं में Mastitis Disease in Cattle: लक्षण, बचाव और इलाज

दूध दुहते वक्त गाय बार-बार पैर मार रही है? दूध में छोटे-छोटे थक्के आ रहे हैं या रोज मिलने वाला दूध अचानक घट गया है? ऐसे बदलावों को मामूली समझकर छोड़ना ठीक नहीं। कई बार इसकी वजह थन में संक्रमण होता है, जो भारतीय डेयरी फार्मों में एक आम परेशानी है।

मवेशियों में थनैला रोग (Mastitis disease in cattle) होने पर पशुपालक को दोहरी मुश्किल झेलनी पड़ सकती है। एक ओर दूध कम मिलने लगता है और उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है, दूसरी ओर गाय या भैंस की देखभाल और इलाज का खर्च बढ़ जाता है।

शुरुआत में इस बीमारी के संकेत हल्के हो सकते हैं। इसलिए आगे इसके कारण, पहचानने योग्य लक्षण, बचाव और इलाज से जुड़ी जरूरी बातें समझाई गई हैं, ताकि पशुपालक सही समय पर कदम उठा सकें।

गाय और भैंस में थनैला रोग क्या होता है?

गाय में थनैला रोग (Mastitis Disease in Cow) में पशु के थन यानी स्तन ग्रंथि में सूजन आ जाती है। ज्यादातर मामलों में यह बैक्टीरिया या दूसरे सूक्ष्मजीवों के संक्रमण से होता है।

गायों में थनैला रोग (Mastitis in Cows) दो तरह का होता है:

1. क्लिनिकल थनैला रोग (Clinical mastitis): इसमें बदलाव साफ नजर आ सकते हैं। थन सूजा हुआ या छूने पर दर्दनाक हो सकता है। दूध निकालते समय उसमें थक्के भी दिखाई दे सकते हैं।

2. सबक्लिनिकल थनैला रोग (Subclinical mastitis): इस प्रकार में बीमारी के बाहरी लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन दूध का उत्पादन और उसकी गुणवत्ता धीरे-धीरे कम होने लगती है।

भारतीय अध्ययनों में अक्सर पाया गया है कि सबक्लिनिकल थनैला रोग के मामले क्लिनिकल थनैला रोग की तुलना में कई गुना अधिक होते हैं। इसके कारण पशुपालकों को हर बार दूध निकालते समय बिना जानकारी के आर्थिक नुकसान हो सकता है।

गायों में थनैला रोग होने के कारण (Causes of Mastitis in Cows)

गायों में थनैला रोग होने के कई कारण हो सकते हैं। अधिकतर संक्रमण तब शुरू होता है, जब रोगाणु थन की नली के माध्यम से अंदर प्रवेश करते हैं। विशेष रूप से दूध निकालने के तुरंत बाद संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है, क्योंकि उस समय थन की नली कुछ समय तक खुली रहती है।

गायों में थनैला रोग के प्रमुख कारण नीचे दिए गए हैं:

कारण का प्रकार

सामान्य उदाहरण

संक्रमण कैसे फैलता है

संक्रामक बैक्टीरिया

स्टैफिलोकोकस ऑरियस, स्ट्रेप्टोकोकस एगालैक्टिए

दूध निकालने वाले व्यक्ति के हाथों, तौलियों और दूध निकालने वाली मशीन से

पर्यावरण में मौजूद बैक्टीरिया

ई. कोलाई, क्लेबसिएला, स्ट्रेप्टोकोकस यूबेरिस

गीले बिछावन, कीचड़ और गोबर से

फंगस और यीस्ट

कैंडिडा, एस्परजिलस

नम पशुशालाओं और गंदे उपचार उपकरणों से

शारीरिक कारण

थन में चोट, जरूरत से अधिक दूध निकालना, खराब मशीन

थन के ऊतकों को नुकसान पहुंचने से उनकी प्राकृतिक सुरक्षा कमजोर होती है

थनैला रोग का खतरा बढ़ाने वाले कारक

  • पशुशाला में गंदगी या पानी भरा रहना।
  • समय पर या पूरी तरह दूध न निकालना।
  • आहार में खनिजों और विटामिनों की कमी।
  • अत्यधिक गर्मी या परिवहन के कारण तनाव।
  • अधिक दूध देने वाली संकर नस्ल की गायें, जिनमें इस बीमारी का खतरा अधिक हो सकता है।

गायों में थनैला रोग के लक्षण (Symptoms of Mastitis in Cows)

गायों में थनैला रोग के लक्षण समय पर पहचानना बहुत जरूरी है। बीमारी की शुरुआती अवस्था में उपचार शुरू करने से पशु के ठीक होने की संभावना बेहतर हो सकती है और थन को स्थायी नुकसान पहुंचने का खतरा कम किया जा सकता है।

1. छिपे हुए थनैला रोग के लक्षण

इस स्थिति में बीमारी के स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन कुछ बदलावों से संक्रमण का पता लगाया जा सकता है।

  • बिना किसी स्पष्ट कारण के दूध उत्पादन में धीरे-धीरे कमी आना।
  • कैलिफोर्निया थनैला रोग जांच का परिणाम सकारात्मक आना।
  • दूध सामान्य दिखाई देने के बावजूद उसकी गुणवत्ता और सुरक्षित रखने की अवधि कम होना।

2. आंखों से दिखने वाले थनैला रोग के लक्षण

बीमारी कितनी बढ़ी है

क्या दिखाई देता है

हल्का संक्रमण

दूध में छोटे थक्के या झिल्ली जैसी परत दिखना, दूध पतला या पानी जैसा हो जाना

मध्यम संक्रमण

थन का वह हिस्सा गरम और सूजा हुआ रहना, छूने पर दर्द, दूध में थक्के और दूध कम निकलना

गंभीर संक्रमण

बुखार, चारा न खाना, आंखें अंदर धंसना, दूध में मवाद या खून, थन पत्थर की तरह सख्त होना और पशु का कमजोर पड़ जाना

काम की बात: हर बार दूध निकालने से पहले पहली कुछ धार स्ट्रिप कप में निकालकर देखें। कप की सतह गहरे रंग की हो तो दूध के थक्के और छोटे-छोटे कण साफ दिख जाते हैं।

पशु को बुखार हो या उसने चारा खाना छोड़ दिया हो, तो उसी दिन पशु चिकित्सक को दिखाएं।

गायों में थनैला रोग का इलाज (Mastitis Treatment in Cows)

इलाज जितना जल्दी शुरू हो, उतना अच्छा। शुरुआती लक्षण दिखने के कुछ घंटों के अंदर ही सही देखभाल शुरू करें और पशु चिकित्सक की सलाह लें।

गायों में थनैला रोग का इलाज तीन बातों पर टिका है: शुरुआती देखभाल, साफ-सफाई और पशु चिकित्सक की बताई दवाएं।

1. पशुशाला में तुरंत क्या करें

  • बीमार गाय को बाकी स्वस्थ पशुओं से अलग बांधें और उसका दूध सबसे आखिर में निकालें।
  • पशु चिकित्सक की सलाह के मुताबिक प्रभावित थन से बार-बार दूध निकालें और उस दूध को सुरक्षित जगह फेंक दें।
  • सूजन कम करने के लिए ठंडी सिकाई करें।
  • पशु के बैठने और आराम करने की जगह साफ और सूखी रखें।
  • बिना जांच के थन पर घरेलू लेप या आजमाए हुए नुस्खे न लगाएं, इनसे संक्रमण और बढ़ सकता है।

2. पशु चिकित्सक से इलाज

  • पशु चिकित्सक से दूध की जांच (कल्चर और सेंसिटिविटी टेस्ट) करवाएं, ताकि पता चले कि कौन-सा रोगाणु है और कौन-सी दवा उस पर असर करेगी।
  • एंटीबायोटिक सिर्फ पशु चिकित्सक के कहने पर दें और पूरा कोर्स खत्म करें।
  • दवा देने के बाद तय अवधि तक उस पशु का दूध न पिएं और न बेचें, क्योंकि उसमें दवा का असर बचा रह सकता है।
  • अगर थन का कोई हिस्सा लंबे समय तक इलाज से ठीक नहीं होता, तो पशु चिकित्सक की सलाह पर उस हिस्से से दूध लेना बंद करना पड़ सकता है।

भैंस में थनैला रोग का इलाज (Mastitis in Buffalo Treatment)

Mastitis in Buffalo Treatment

भैंसों में थन की नली आमतौर पर संकरी होती है। इसलिए संक्रमण कई बार चुपचाप चलता रहता है और थन सख्त होने के बाद ही साफ पता चलता है।

भैंस में थनैला रोग का इलाज ठीक से हो, इसके लिए थन के चारों हिस्सों की नियमित जांच करते रहें।

भैंस के नहाने, कीचड़ में लोटने और आराम करने की जगह साफ रखें। बाकी इलाज और सफाई के नियम वही अपनाएं जो पशु चिकित्सक गाय के लिए बताते हैं।

समय-समय पर जांच करवाते रहना भैंसों को इस बीमारी से बचाने का सबसे अच्छा तरीका है।

अपने पशुओं को थनैला रोग से कैसे बचाएं?

गाय और भैंस में थनैला रोग से बचाव करना इलाज कराने से सस्ता पड़ता है।

पशुओं में थनैला रोग (Mastitis in Cattle) से बचाने के लिए दूध निकालते समय कुछ आदतें पक्की कर लें।\

बचाव का तरीका

इसका फायदा

प्रत्येक गाय के थन को साफ करें और अलग तौलिए से सुखाएं।

एक पशु से दूसरे पशु में रोगाणुओं का संक्रमण कम होता है।

दूध निकालने के बाद थनों को कीटाणुनाशक घोल में डुबोएं।

थन की नली में रोगाणुओं के प्रवेश का खतरा कम होता है।

दूध निकालने के बाद पशु को ताजा चारा डालें।

चारा खाने में गाय करीब 30 मिनट खड़ी रहती है, इससे संक्रमण का खतरा कम हो सकता है।

पहले स्वस्थ पशुओं का और आखिर में बीमार पशुओं का दूध निकालें।

संक्रमण फैलने की संभावना कम होती है।

पशुशाला सूखी रखें और गोबर समय पर हटाते रहें।

वातावरण में मौजूद नुकसान करने वाले बैक्टीरिया कम होते हैं।

दूध निकालने की मशीनों की नियमित जांच और मरम्मत करवाते रहें।

थन में चोट लगने या खराबी आने का खतरा कम रहता है।

हर महीने थनैला रोग की खास जांच (CMT) करवाएं।

छिपा हुआ संक्रमण समय पर पकड़ में आ जाता है।

पशु चिकित्सक की सलाह से, जब पशु दूध देना बंद करे (ड्राई पीरियड), तब बचाव का इलाज करवाएं।

इस दौरान थन सुरक्षित रहता है।

खनिज और विटामिन सही मात्रा में खिलाएं।

पशु की बीमारी से लड़ने की ताकत बनी रहती है।

एक आसान उदाहरण

मान लीजिए किसी पशुपालक को सोमवार के दिन गाय के एक थन से निकलने वाले दूध में थक्के दिखाई देते हैं।

अगर वह उसी दिन गाय को अन्य पशुओं से अलग करता है और पशु चिकित्सक से उपचार शुरू करवाता है, तो संक्रमण को नियंत्रित करने की संभावना बढ़ जाती है।

लेकिन यदि उसी समस्या को एक सप्ताह तक नजरअंदाज किया जाए, तो संक्रमण गंभीर हो सकता है, दूसरे पशुओं तक फैल सकता है और प्रभावित थन को स्थायी नुकसान भी पहुंचा सकता है।

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जो पशुपालक अच्छी स्वच्छता और उचित पशु चिकित्सा के साथ होम्योपैथिक विकल्प भी अपनाना चाहते हैं, उनके लिए डॉ. गोयल की उत्पाद श्रृंखला में गायों और भैंसों के थन संबंधी स्वास्थ्य के लिए विशेष होम्योपैथिक उत्पाद उपलब्ध हैं।

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दूध का गुलाबी होना, खून के थक्के, ताजे दूध का फटना और पानी जैसा दूध आना

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थन का पत्थर जैसा सख्त होना और कीप के आकार के थन

डॉ. गोयल की होम्योपैथिक पशु औषधियां थन की सूजन और थन से जुड़ी समस्याओं में सहायक देखभाल के लिए उपलब्ध हैं। ध्यान रखें कि थनैला रोग ठीक करने में इन उत्पादों के असर के पक्ष में पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। इन्हें पशु चिकित्सक की बताई

जरूरी चिकित्सा या एंटीबायोटिक उपचार (Antibiotic Treatment) की जगह इस्तेमाल न करें।

किट इस्तेमाल करने से पहले पैक पर लिखे निर्देश पढ़ें और पशु चिकित्सक से सलाह जरूर लें।
गोयल वेट फार्मा (Goel Vet Pharma) की वेबसाइट पर गायों में थनैला रोग और संबंधित उत्पादों की जानकारी देखी जा सकती है।

निष्कर्ष

थन स्वस्थ रहेगा तो पशु को तकलीफ कम होगी और दूध उत्पादन भी बेहतर बना रह सकता है। गाय या भैंस के दूध में छोटे थक्के दिखें, थन में बदलाव आए या दूध अचानक घटे, तो इसे नजरअंदाज न करें। रोज दूध निकालते समय सफाई और थन की जांच पर ध्यान देना जरूरी है।

थन गर्म या सूजा हुआ लगे, दर्द हो या पशु दूध कम देने लगे, तो जल्द पशु चिकित्सक से जांच करवाएं।

सहायक देखभाल के विकल्पों के बारे में जानने के लिए गोयल वेट फार्मा की टीटासूल उत्पाद श्रृंखला की जानकारी देख सकते हैं। लेकिन चल रहे इलाज में कोई बदलाव अपने आप न करें; पहले पशु चिकित्सक की राय लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. क्या गाय में थनैला रोग पूरी तरह ठीक हो सकता है?

हां, शुरुआती समय में बीमारी पकड़ में आ जाए और सही इलाज मिल जाए, तो कई गायें पूरी तरह ठीक हो जाती हैं। लेकिन संक्रमण लंबे समय तक बना रहे तो थन के प्रभावित हिस्से को स्थायी नुकसान हो सकता है। कभी-कभी उस हिस्से से दूध निकालना भी बंद करना पड़ता है।

2. क्या थनैला रोग से पीड़ित गाय का दूध पी सकते हैं?

नहीं। संक्रमित थन से निकलने वाले दूध का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसे दूध को सुरक्षित तरीके से नष्ट करना चाहिए। यदि गाय को एंटीबायोटिक दवाएं दी गई हैं, तो निर्धारित अवधि पूरी होने तक दूध को बिक्री या सेवन के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

3. गाय में छिपे हुए थनैला रोग संक्रमण की पहचान कैसे करें?

गाय में छिपे हुए संक्रमण की पहचान के लिए कैलिफोर्निया थनैला रोग जांच उपयोगी होती है। दूध की शुरुआती धार की जांच करके भी दिखाई देने वाली असामान्यताओं को पहचाना जा सकता है, लेकिन केवल इस तरीके से छिपे हुए थनैला रोग का पता नहीं चलता।

4. किन पशुओं में थनैला रोग होने का खतरा अधिक होता है?

अधिक दूध देने वाली संकर नस्ल की गायों, हाल ही में बछड़े को जन्म देने वाले पशुओं और गंदी या गीली पशुशालाओं में रहने वाले पशुओं में थनैला रोग होने का खतरा अधिक हो सकता है।

5. क्या थनैला रोग में होम्योपैथी मदद करती है?

टीटासूल जैसी होम्योपैथिक किट का उपयोग कुछ पशुपालक सहायक देखभाल के लिए करते हैं। हालांकि, थनैला रोग को ठीक करने में होम्योपैथी के प्रभाव के पर्याप्त विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए स्वच्छता बनाए रखना और पशु चिकित्सक द्वारा निर्धारित उपचार का पालन करना जरूरी है।

6. गाय और भैंस के थन की जांच कितनी बार करनी चाहिए?

हर बार दूध निकालते समय दूध की शुरुआती धार की जांच करनी चाहिए। इसके अलावा छिपे हुए संक्रमण की पहचान के लिए कम से कम महीने में एक बार कैलिफोर्निया थनैला रोग जांच करना उपयोगी हो सकता है।

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